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वानखेड़े के पिच क्यूरेटर BCCI से नाराज, बोले- यह क्रिकेट नहीं है

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वानखेड़े के पिच क्यूरेटर BCCI से नाराज, बोले- यह क्रिकेट नहीं है

भारतीय पिचों पर बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे और युवा गेंदबाजों की धुनाई से वानखेड़े स्टेडियम के चीफ क्यूरेटर रमेश म्हामुणकर नाराज हैं। उन्होंने वनडे क्रिकेट में पाटा पिचों और BCCI के निर्देशों पर सवाल उठाए हैं।

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में बल्लेबाजों के अनुकूल पिचों को लेकर बहस तेज हो गई है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम के चीफ पिच क्यूरेटर रमेश म्हामुणकर ने भारत में तैयार की जा रही पाटा पिचों पर नाराजगी जताते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के निर्देशों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वनडे क्रिकेट में पिच का संतुलित होना जरूरी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में भारत में खेले गए वनडे मुकाबलों में रन रेट 7.11 और टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 10.66 रन प्रति ओवर रहा है। इसी बीच आकिब नबी, अंशुल कंबोज, गुरनूर बराड़ और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे युवा गेंदबाजों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में महंगे स्पेल का सामना करना पड़ा।

आकिब नबी ने वनडे डेब्यू पर 8.5 ओवर में 84 रन दिए, जबकि अंशुल कंबोज ने 9 ओवर में 82 रन खर्च किए। गुरनूर बराड़ ने दो विकेट लेकर 96 रन दिए और नीतीश कुमार रेड्डी को भी विकेट नहीं मिला।

हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में म्हामुणकर ने कहा कि वनडे क्रिकेट में गेंदबाजों को भी पिच से मदद मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, संतुलित विकेट पर शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों और बाद के चरण में स्पिनरों को सहायता मिल सकती है।

उन्होंने दावा किया कि बल्लेबाजी के अनुकूल पिचें बनाने के निर्देश दिए जाते हैं, जिससे तेज गेंदबाजों और स्पिनरों दोनों को नुकसान होता है। म्हामुणकर ने यह भी बताया कि एमएस धोनी वानखेड़े की पिच को भारत की बेहतरीन पिचों में से एक मानते हैं।
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