पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर के भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों को लेकर दिए गए बयान पर पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अय्यर ने कहा था कि दक्षिण एशिया में भारत की मजबूत आवाज तभी उभर सकती है, जब पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित हो और चीन के साथ सीमा विवाद का समाधान निकाला जाए। उन्होंने दोनों मामलों को बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही थी।
अय्यर ने यह भी सवाल उठाया था कि अगर भारत पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस दिखा सकता है, तो फिर बातचीत की मेज पर बैठने का साहस क्यों नहीं दिखाता। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने के लिए संवाद जरूरी है।
अय्यर के इस रुख पर कंवल सिब्बल ने सवाल उठाया कि आखिर शांति कायम करने के लिए भारत को कौन-सी रियायत देनी चाहिए और बदले में पाकिस्तान या चीन भारत को क्या रियायत देने के लिए तैयार हैं। सिब्बल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ वर्षों तक बातचीत कर चुका है। मुंबई आतंकी हमले के बाद भी बातचीत के प्रयास हुए, लेकिन उनके मुताबिक इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
सिब्बल ने पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उसने सार्क को प्रभावी रूप से निष्क्रिय कर दिया। उन्होंने पूछा कि मौजूदा पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान भारत के साथ शांति के लिए क्या रियायत देने को तैयार है।
चीन को लेकर भी सिब्बल ने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से बातचीत चल रही है और प्रक्रिया अभी जारी है। उनका सवाल था कि क्या कोई ऐसा संकेत मिला है कि चीन सीमा विवाद को समान और न्यायसंगत आधार पर सुलझाने के लिए तैयार है।
सिब्बल ने अंत में कहा कि शांति स्थापित करने की पूरी जिम्मेदारी भारत पर डालना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, यह मान लेना कि भारत ही समस्या पैदा करने वाला पक्ष है और उसे ही शांति के लिए पहल करनी चाहिए, अनावश्यक कूटनीतिक आत्म-भर्त्सना है।
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आखिर भारत ही क्यों दे रियायत? कंवल सिब्बल ने पूछा सवाल
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