तेहरान। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। ईरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि अमेरिका या इजरायल उसके खिलाफ नए सैन्य हमले करते हैं, तो संभावित संघर्ष केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। इसकी चपेट में यूरोप और हिंद महासागर में मौजूद विदेशी सैन्य ठिकाने भी आ सकते हैं।
ईरान ने दी व्यापक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के कई सैन्य अधिकारियों और सांसदों ने संभावित अमेरिकी हमले के जवाब में बड़े स्तर पर कार्रवाई की बात कही है।
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को किसी भी हमले का तत्काल और व्यापक जवाब देने की तैयारी रखने को कहा है।
हालांकि, इन निर्देशों और संभावित सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यूरोप के अमेरिकी सैन्य अड्डों को लेकर चिंता
ईरान से जुड़े अखबार काहयान ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि नए हमले की स्थिति में यूरोप में मौजूद अमेरिकी और नाटो सैन्य ठिकाने संभावित जवाबी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
रिपोर्ट में ब्रिटेन, साइप्रस, ग्रीस, रोमानिया, अल्बानिया और इटली जैसे देशों का उल्लेख किया गया है।
इससे उन यूरोपीय देशों की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं, जहां अमेरिकी सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं।
डिएगो गार्सिया क्यों है महत्वपूर्ण?
इस विवाद में हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे का नाम भी सामने आया है।
यह ब्रिटेन और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र है। हिंद महासागर में इसकी स्थिति इसे पश्चिम एशिया और आसपास के समुद्री क्षेत्रों के लिए विशेष महत्व देती है।
रिपोर्ट में डिएगो गार्सिया को संभावित ईरानी जवाबी कार्रवाई से जुड़ी चेतावनियों में शामिल बताया गया है।
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने क्या कहा?
ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अक्रामिनिया ने चेतावनी दी है कि ईरान पर कोई नया हमला संघर्ष को पहले से प्रभावित देशों के बाहर भी फैला सकता है।
उनके अनुसार, युद्ध का विस्तार होने पर इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
भारत और वैश्विक सुरक्षा पर संभावित असर
हिंद महासागर में सैन्य तनाव बढ़ने से समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा हो सकती हैं।
भारत के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम एशिया और हिंद महासागर अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा ऊर्जा परिवहन के प्रमुख मार्ग हैं।
फिलहाल ये बयान संभावित जवाबी कार्रवाई की चेतावनियां हैं। संबंधित सैन्य अड्डों पर नए हमलों की पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।