मालदीव-पाकिस्तान रक्षा समझौतों पर विवाद, पूर्व रक्षा मंत्री मारिया दीदी ने उठाए सवाल
माले। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के पाकिस्तान दौरे और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों को लेकर मालदीव की घरेलू राजनीति में विवाद बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुइज्जू ने 20 से 22 अक्टूबर 2026 के दौरान पाकिस्तान का दौरा किया और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच 20 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें व्यापार, पर्यटन, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल बताए गए हैं।
पूर्व रक्षा मंत्री मारिया दीदी ने क्या कहा?
मालदीव की पूर्व रक्षा मंत्री मारिया दीदी ने पाकिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के दीर्घकालिक परिणामों की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि मालदीव जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश को किसी भी रक्षा समझौते से पहले अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति की स्वतंत्रता का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति पाकिस्तान के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों से नहीं, बल्कि संवेदनशील रक्षा समझौतों में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं होने की आशंका से जुड़ी है।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा समझौतों पर सवाल
मारिया दीदी ने सरकार से पूछा है कि इन समझौतों के तहत किस प्रकार का सैन्य प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, उपकरणों की खरीद या खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने समझौतों की वित्तीय शर्तों, परिचालन जिम्मेदारियों और भविष्य में उनकी समीक्षा या समाप्ति के प्रावधानों को सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
साइबर सुरक्षा और संवेदनशील डेटा की चिंता
पूर्व रक्षा मंत्री ने डेटा संप्रभुता और साइबर सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने सवाल किया कि संवेदनशील सरकारी और समुद्री जानकारी तक किसकी पहुंच होगी, डेटा कहां सुरक्षित रखा जाएगा और स्वतंत्र ऑडिट की क्या व्यवस्था होगी।
हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान को मालदीव के सरकारी डेटा तक पहुंच मिलने का कोई सार्वजनिक प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है।
भारत-मालदीव संबंधों पर संभावित असर
हिंद महासागर में मालदीव की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को देखते हुए विपक्ष ने आशंका जताई है कि नए रक्षा संबंध क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भी पाकिस्तान के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग पर चिंता व्यक्त की है।
सरकार से पारदर्शिता की मांग
मारिया दीदी ने कहा कि किसी भी विदेशी रक्षा साझेदारी का मूल्यांकन उसके तत्काल लाभों के साथ-साथ देश की भविष्य की रणनीतिक स्वतंत्रता के आधार पर होना चाहिए।
फिलहाल विपक्ष समझौतों की शर्तों, डेटा सुरक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर उनके संभावित प्रभावों को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांग रहा है। इन आशंकाओं से किसी वास्तविक सुरक्षा उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती।