नई दिल्ली। भारतीय नौसेना अपनी समुद्री युद्ध क्षमता को मजबूत बनाने के लिए राफेल-M (Rafale Marine) लड़ाकू विमानों को स्वदेशी हथियारों से लैस करने की दिशा में काम कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस से खरीदे जा रहे 26 राफेल मरीन विमानों में भविष्य में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की विकसित नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) को शामिल करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इस मिसाइल की प्रस्तावित मारक क्षमता करीब 350 किलोमीटर बताई गई है।
फ्रांसीसी एक्सोसेट मिसाइल का स्वदेशी विकल्प
राफेल मरीन के लिए फ्रांसीसी AM39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल एक उपलब्ध हथियार विकल्प है। रिपोर्ट में इसके एक संस्करण की मारक दूरी लगभग 70 किलोमीटर बताई गई है। भारतीय नौसेना लंबी दूरी से समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता विकसित करना चाहती है। ऐसे में NASM-MR का संभावित इंटीग्रेशन एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
NASM-MR मिसाइल की खासियत क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, DRDO की NASM-MR मिसाइल का अनुमानित वजन लगभग 600 किलोग्राम है। इसे सबसोनिक क्रूज मिसाइल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसकी गति करीब मैक 0.9 बताई गई है। यह समुद्र की सतह के करीब उड़ान भरकर दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन की गई है।
मिसाइल में कथित तौर पर सी-स्किमिंग और टर्मिनल मैन्यूवर जैसी क्षमताएं विकसित की जा रही हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य लक्ष्य के करीब पहुंचते समय दुश्मन की रक्षा प्रणाली के लिए चुनौती बढ़ाना है।
मिग-29 से परीक्षण, राफेल-M के लिए 2030 का लक्ष्य
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, NASM-MR को मिग-29K विमानों के साथ जोड़ने की दिशा में परीक्षण और विकास कार्य जारी हैं। 2027 तक मिग-29K तथा 2030 तक राफेल-M में इसके संभावित एकीकरण का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि, इन समयसीमाओं की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
भारतीय नौसेना को क्या होगा फायदा?
पूर्व नौसेना अधिकारी कैप्टन श्याम कुमार के अनुसार, लंबी दूरी की स्वदेशी मिसाइल से राफेल-M दुश्मन के युद्धपोतों को अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी से निशाना बनाने में सक्षम हो सकता है। इससे विमान को विरोधी की वायु रक्षा सीमा के भीतर जाने की जरूरत कम हो सकती है।
साथ ही, भारत में मिसाइल उत्पादन से हथियारों की उपलब्धता, रखरखाव और आपूर्ति में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, राफेल-M और NASM-MR का अंतिम एकीकरण, परीक्षणों, तकनीकी मंजूरी और आवश्यक समझौतों पर निर्भर करेगा।