मुंबई। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की नई एडवाइजरी ने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल बढ़ा दी है। फिल्मों के सर्टिफिकेशन, रिलीज डेट और टाइटल से जुड़ी शर्तों को लेकर फिल्म निर्माताओं की चिंताएं सामने आ रही हैं। इसी बीच दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' के निर्देशक हनी त्रेहान ने नए दिशानिर्देशों की कड़ी आलोचना की है।
CBFC की नई एडवाइजरी में क्या बदला?
रिपोर्ट के अनुसार, सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 और सिनेमैटोग्राफ रूल्स, 2024 के तहत प्रमाणन चाहने वाले निर्माताओं के लिए बोर्ड ने पांच प्रमुख शर्तों पर जोर दिया है।
पहली शर्त: फिल्म का सर्टिफिकेशन आवेदन तभी किया जाए, जब उसका अंतिम संस्करण तैयार हो।
दूसरी शर्त: फिल्म में फाइनल ग्राफिक्स, बैकग्राउंड स्कोर और साउंड मिक्स सहित जरूरी तकनीकी कार्य पूरे हों।
तीसरी शर्त: सिनेमाघरों में प्रदर्शन के लिए निर्धारित एक्सेसिबिलिटी सुविधाएं भी शामिल हों।
चौथी शर्त: पहले से घोषित फिल्म टाइटल को बोर्ड की अंतिम स्वीकृति नहीं माना जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर नाम बदलने की स्थिति बन सकती है।
पांचवीं शर्त: निर्माताओं द्वारा घोषित रिलीज डेट के आधार पर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई जाएगी। अधूरे आवेदन लौटाए या खारिज किए जा सकते हैं।
हनी त्रेहान ने जताई कड़ी नाराजगी
निर्देशक हनी त्रेहान ने सोशल मीडिया पर नई एडवाइजरी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। उन्होंने इसे देश में कायरता और तानाशाही का संकेत बताते हुए बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उनकी फिल्म 'सतलुज', जिसका शुरुआती नाम 'पंजाब 95' था, सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, सर्टिफिकेशन में देरी के बाद फिल्म जुलाई में ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन विवाद के चलते बाद में हटा ली गई।
कई फिल्मों के नाम और रिलीज पर विवाद
हाल के समय में सलमान खान की फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' का नाम 'मातृभूमि' और मनोज बाजपेयी की फिल्म 'घूसखोर पंडत' का नाम 'गजब रात' किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
वहीं, विजय की 'जन नायकन' के सर्टिफिकेशन और रिलीज से जुड़ा विवाद भी चर्चा में रहा है।
सनी देओल की 'सूर्या' पर भी कानूनी विवाद
इसी बीच सनी देओल की आगामी फिल्म 'सूर्या: अंत से आरंभ तक' के टीजर पर डॉक्टरों ने आपत्ति जताई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म में निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की नकारात्मक छवि प्रस्तुत की गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 16 नवंबर तय की है। फिलहाल फिल्म पर प्रतिबंध का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया है।
नई एडवाइजरी के बाद फिल्म प्रमाणन की प्रक्रिया और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है।