SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया है। अदालत ने यह निर्देश भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से प्रस्तुत हलफनामे के बाद दिया। आयोग ने अपने जवाब में SIR प्रक्रिया को कानून के अनुरूप बताते हुए फैसलों में अनियमितता के आरोपों से इनकार किया है।
चुनाव आयोग ने 248 पन्नों में रखा पक्ष
निर्वाचन आयोग ने 248 पन्नों का हलफनामा दाखिल कर कहा कि SIR से संबंधित तीनों आदेश आयोग के तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे। आयोग के अनुसार, हलफनामा दाखिल करने का निर्णय भी सभी सदस्यों की सहमति से लिया गया। आयोग ने अपने कामकाज पर लगाए गए आरोपों को अनुचित बताया और कहा कि मतदाता सूची की समीक्षा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर विवाद
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में आवश्यक मंजूरी के बिना बदलाव किए गए। हालांकि चुनाव आयोग ने किसी भी संशोधन से इनकार किया है। राज्यसभा सदस्य डोला सेन की नई याचिका में भी बिहार SIR के दौरान फॉर्म-6 में कथित बदलाव का मुद्दा उठाया गया है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने आयोग के दावों पर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट ने नई याचिका पर जारी किया नोटिस
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने डोला सेन की याचिका पर चुनाव आयोग और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। प्रथम याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह को आयोग के जवाब पर 10 दिन में अपना पक्ष रखने को कहा गया। अदालत ने संकेत दिया कि संबंधित सभी मुद्दों की समीक्षा की जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध भी चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, 25 सितंबर को प्रकाशित एक समाचार में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ SIR आदेशों पर आपत्तियां जताई थीं। इन दावों के बाद चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठे। हालांकि आयोग ने सर्वसम्मति से फैसले लेने की बात दोहराई है। अब याचिकाकर्ताओं के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई होगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।