National News

भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव का आगाज, गुरुदेव को याद कर भावुक हुए पीएम मोदी

⭐ Featured 📈 Trending
भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव का आगाज, गुरुदेव को याद कर भावुक हुए पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम ने उन्हें 1993 में हुई मुलाकात की याद दिलाई।

भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव का आगाज, गुरुदेव को याद कर भावुक हुए पीएम मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन' का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को साझा किया। कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक की मदद से प्रस्तुत गुरुदेव के होलोग्राफिक प्रोजेक्शन को देखकर प्रधानमंत्री भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि इस अनुभव ने उन्हें वर्ष 1993 में वडोदरा में हुई मुलाकात की याद दिला दी।

33 साल पुरानी यादें हुईं ताजा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुदेव का होलोग्राफिक स्वरूप देखकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ, मानो वह 33 साल पीछे चले गए हों। उन्होंने याद किया कि 1993 में वडोदरा में स्वामी चिन्मयानंद के साथ उनकी मुलाकात हुई थी। उस दौरान मिला स्नेह, बातचीत और आशीर्वाद आज भी उनके मन में सुरक्षित है।

प्रधानमंत्री ने इस विशेष प्रस्तुति के लिए चिन्मय मिशन के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक ने एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्मृति को फिर से जीवंत कर दिया।

चिन्मय मिशन को बताया विचार और संकल्प का प्रतीक

सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन की आध्यात्मिक और सामाजिक यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक व्यापक दर्शन और विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, मिशन दशकों से अपने मूल्यों, सेवा भावना और आध्यात्मिक शिक्षाओं को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने चिन्मय अमृत महोत्सव को इस दीर्घकालीन यात्रा का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण पर विशेष जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव के साथ अपनी पुरानी बातचीत का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय चर्चा का प्रमुख विषय युवाओं की शक्ति और भारत का भविष्य था।

उन्होंने कहा कि युवाओं की क्षमताओं को पहचानना, उन्हें सही दिशा देना और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा देश को अधिक सशक्त तथा सक्षम भारत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले हुई थी मुलाकात

प्रधानमंत्री ने अपने जीवन की उस अवधि को भी याद किया जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री नहीं बने थे। उन्होंने बताया कि गुरुदेव से मुलाकात के कुछ वर्षों बाद उन्हें गुजरात की जनता की सेवा करने का अवसर मिला।

प्रधानमंत्री ने जनता के विश्वास और संतों के आशीर्वाद को अपने सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक तकनीक का संगम

भारत मंडपम में आयोजित सम्मेलन में आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक तकनीक का विशेष संगम देखने को मिला। स्वामी चिन्मयानंद की होलोग्राफिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम को यादगार बनाया।

यह आयोजन चिन्मय मिशन के विचारों, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और युवा शक्ति के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के संदेश को सामने लाने का अवसर बना।

← Back to All News