नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने सकारात्मक अनुमान जताया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में भारत की GDP वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। हालांकि, IMF ने चेताया है कि इस रफ्तार को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए भूमि, श्रम, व्यापार और विदेशी निवेश से जुड़े सुधार जरूरी होंगे।
आर्थिक विकास के लिए सुधारों पर जोर
IMF के एशिया एवं प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने बिजनेस टुडे को दिए साक्षात्कार में कहा कि भारत को केवल तेज आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि मजबूत और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, इसके लिए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में लंबित सुधारों को आगे बढ़ाना आवश्यक है।
भूमि और श्रम सुधार क्यों महत्वपूर्ण?
श्रीनिवासन ने श्रम बाजार और भूमि से जुड़े नियमों में सुधार को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अभी काफी काम बाकी है। विशेष रूप से विदेशी कंपनियों के लिए जमीन की उपलब्धता निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
FDI और व्यापार बाधाओं पर चिंता
IMF अधिकारी के अनुसार, भारत को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाने के लिए कारोबारी माहौल अधिक अनुकूल बनाना होगा। उन्होंने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने तथा व्यापार को अधिक सुगम बनाने की आवश्यकता बताई। इससे नए उद्योग, उत्पादन क्षमता और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
GDP वृद्धि अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत
रिपोर्ट के मुताबिक, IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का विकास अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावनाओं के प्रति सकारात्मक संकेत है। हालांकि, GDP वृद्धि का अनुमान वास्तविक परिणाम की गारंटी नहीं होता।
जापान से आगे निकलने की संभावना
IMF के अनुमानों के अनुसार, भारत 2027 तक जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह अनुमान मौजूदा कीमतों पर अर्थव्यवस्था के आकार से संबंधित है। श्रीनिवासन ने कहा कि रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास को भी आर्थिक प्रगति का प्रमुख हिस्सा बनाना होगा।
महंगाई और ऊर्जा संकट से जोखिम
IMF ने ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, महंगाई, सख्त मौद्रिक नीति, AI क्षेत्र में बदलाव और अल नीनो जैसे जोखिमों का उल्लेख किया है। इनका असर उत्पादन, निवेश और उपभोग पर पड़ सकता है।
केंद्र और राज्यों के तालमेल की जरूरत
भारत ने डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब केंद्र और राज्य सरकारों के बेहतर समन्वय, निवेश को प्रोत्साहन और रोजगार सृजन से विकास को अधिक व्यापक बनाया जा सकता है। IMF का मुख्य संदेश है कि 7 प्रतिशत की आर्थिक रफ्तार को टिकाऊ बनाने के लिए निरंतर सुधार आवश्यक हैं।