नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुंबई दौरे को लेकर भारत में राजनीतिक विवाद जारी है। रुबियो अमेरिका लौट चुके हैं, लेकिन उनकी यात्रा और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई मुलाकात को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सवालों के बाद अब पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी ने मुंबई में मुलाकात पर क्यों उठाए सवाल?
विवाद की शुरुआत राहुल गांधी की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने जयशंकर और मार्को रुबियो की मुंबई में हुई मुलाकात को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसा। राहुल गांधी ने इस मुलाकात को 'तलब किया जाना' बताया था। उनका सवाल था कि अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली के बजाय मुंबई में बैठक क्यों हुई।
इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विपक्ष की आलोचना को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि विदेशी नेताओं से राष्ट्रीय राजधानी के बाहर मुलाकात करना कोई नई बात नहीं है।
जयशंकर ने इंदिरा गांधी और शिमला समझौते का दिया उदाहरण
जयशंकर ने अपने जवाब में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह पाकिस्तान के तत्कालीन नेता जुल्फिकार अली भुट्टो से मिलने शिमला गई थीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसे भी तलब किया जाना कहा जाएगा?
विदेश मंत्री ने सलमान खुर्शीद के जयपुर में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मिलने का उदाहरण भी दिया। उनका तर्क था कि किसी बैठक का स्थान अपने आप में देश की प्रतिष्ठा या राजनयिक संबंधों का पैमाना नहीं हो सकता।
सलमान खुर्शीद ने विदेश नीति की गंभीरता पर दिया जोर
जयशंकर की प्रतिक्रिया के बाद सलमान खुर्शीद ने कहा कि विदेश नीति बेहद गंभीर विषय है, जिसे सामान्य बहस की तरह नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार, किसी देश की राजधानी उसकी राजनीतिक और संस्थागत व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक होती है।
खुर्शीद ने सवाल उठाया कि यदि कोई विदेशी नेता राजधानी आए बिना ही महत्वपूर्ण मुलाकातें करके लौट जाता है, तो उसके राजनयिक संदेश और उद्देश्य पर चर्चा करना स्वाभाविक है।
उन्होंने यह भी कहा कि पेशेवर राजनयिकों की सलाह विदेश नीति के फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए उठाए गए सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जाना चाहिए।
क्या मुंबई में बैठक होना कूटनीतिक विवाद का कारण है?
खुर्शीद ने स्पष्ट किया कि शिमला में इंदिरा गांधी की मुलाकात भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद आयोजित महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन से जुड़ी थी। इसलिए सभी बैठकों की परिस्थितियों को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि दिल्ली से बाहर होने वाली उच्चस्तरीय बैठकें भी सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं।
फिलहाल यह विवाद मुख्य रूप से राजनयिक शिष्टाचार, बैठक के स्थान और राजनीतिक व्याख्या को लेकर है। केवल मुंबई में बैठक होने से किसी पक्ष के दबाव में आने या किसी नेता को तलब किए जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।